SOVEREIGN GOLD BOND VS GOLD ETF VS GOLD
गोल्ड
यह सोने में निवेश करने का सबसे पुराना और सबसे सुरछित तरीका माना जाता रहा है पर क्या वाकई में ऐसा है अगर मुझसे पुछा जाये तो नहीं खासतौर पे तब जब निवेश की बात हो रही हो अगर हम सोने को निवेश के लिए एक ऐसेट्स क्लास के रूप में चुने और सोना खरीद कर अपने पास रख ले तो इसमें सबसे बड़ी भाव और सोने की क्वालिटीज़ को लेकर इशू आते है जैसे की आप गोल्ड कॉइन के रूप में सोने को खरीद के अपने पास रख ले तो जब आप उसे खरीदेंगे तब १८% टैक्स के रूप में चुकाना पड़ेगा और २०-२५% मेकिंग चार्ज देने पड़ेगे और जब बेचने जायेगे तब भी १८% टैक्स देना पड़ेगा तो इस तरह से आज अगर सोने का दाम ४८५० पर ग्राम है तो वो आपको लगभग ५२०० से ५३०० के बीच में पड़ेगा और वही आप अगर बेचने जा रहे है तो ४००० पर ग्राम पड़ेगा तो इस तरह से सोना में निवेश करना ठीक नहीं है और इसके चोरी होने का भी डर है
तो आईये देखते है सोने में निवेश करने के आधुनिक तरीको पर और उनके फायदे और नुकसान पर|
गोल्ड इ टी ऍफ़
फायदे
- इसका सबसे बड़ा फायदा ये है की ये लिक्विड है अगर कभी भी आपको पैसे की जरुरत हुई तो अपनी यूनिट बेचकर इससे पैसे निकाल सकते है
- इसमें खरीदने बेचने का खर्चा बहुत कम है लगभग ना के बराबर है तो इससे निवेशक को बहुत सहूलियत मिलती है अगर निवेशक को छोटा मुनाफा भी हो रहा है तो उसका लाभ उसको मिलेगा
- चूकी ये डीमैट में रहता है तो इसमें चोरी होने का खतरा नहीं है
नुकसान
- इसमें बस आम निवेशक को एक ही खतरा है अगर ए म सी कोई मिस मैनेजमेंट करती है तो इसके भाव में १-२% का नुकसान हो सकता है पर अगर ऐसा होता है तो आप उस ए म सी को छोड़कर कहि दूसरे अच्छे विकल्प अपना ले या तो निवेश करने से पहले ही उस ए म सी का ट्रैक रिकॉर्ड देख ले
गोल्ड बांड
गोल्ड बांड सोने में निवेश करने का एक सरल तरीका है खासतौर से भारत में गोल्ड बांड भारत सरकार के गारंटी के साथ आता है और सोने पे सुहागा ये है की इसपे ब्याज भी मिलता है तो आईये देखते है इसके फायदे और नुकसान को
फायदे
- इसका सबसे बड़ा फायदा ये है की इसके निवेश का समय पूरा होने पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता है
- यहा पर निवेशक को कैपिटल गेन के साथ ब्याज भी मिलता है
- भारत सरकार की गारण्टी है इसलिए किसी तरह के डिफ़ॉल्ट की कोई भी सम्भावना नहीं है
- गोल्ड बांड में खर्चा शून्य है जो की सोने पे सुहागा है
नुकसान
- इसमें बस एक ही कमी इसके आलोचक निकालते है वो है इसकी परिपक़्वता अवधि को लेके की नहीं जी ८ साल तो बड़ा लम्बा टाइम होता है अगर अचानक से किसी को पैसे की जरुरत पड गई फिर क्या ? लेकिन ये भी कोई समस्या नहीं है क्योकि १५ दिन बाद में एक्सचेंज में लिस्ट हो जाता है तो निवेशक को यहां भी कोई परेशान होने वाली बात नहीं है
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